अब किससे शिकवा करें, जब अपना ही दिल बेवफाई कर गया?
Whether it's classical poetry or a whole new creation, the delivery of every generation is connected to the deep encounter of its creator. The difference between an ordinary poem and a great Shayari lies in its capacity to touch the guts and make the reader experience comprehended.
अब शिकवा किससे करें, जब अपने ही गैर हो जाएं।
तुम्हारे बिना जीना कोई जीने से कम नहीं,
वो साथ था पर दिल से नहीं, मैं साथ था पर नसीब से नहीं।
अब यही सोचते हैं कि तुम्हारे बिना खुद को कैसे संभाल सकते हैं…!!!
तू चला गया तो क्या हुआ, तेरी यादें अब भी साथ हैं।
अब तो हर वक़्त, दिल में तेरा ही राज़ चलता है।
कभी प्यार जताया था, कभी दर्द दिया, अब तेरा नाम भी मेरी यादों से मिट गया।
तेरी हँसी सुनकर कभी सारा जहाँ खूबसूरत लगता था,
मुझे रोता हुआ Sad Shayari देखकर वो मुस्कुरा दिया, काश! मेरा दर्द ही मेरी खुशी होती।
तेरी दिल की धड़कनें सांसे रोक देती हैं,
मोहब्बत में हार कर भी तुझे याद करता हूँ,
पर उसने सिर्फ़ वक़्त गुज़ारा, याद नहीं रखा।